इसरो और आईआईजी ने संयुक्त रूप से पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दो
दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया
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दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया।
08 अक्तूबर, 2026
6-7 अक्टूबर, 2026 के दौरान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान (आईआईजी) के साथ संयुक्त रूप से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्रीविजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) में टैगोर कॉलेज के सेमिनार हॉल में अंतरिक्ष विज्ञान संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 200 से ज़्यादा लोगों ने प्रतिभागिता की, जिनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के विभिन्न विषयों के 180 स्नातक और परास्नातक छात्र, और डीबीआरएआईटी कॉलेज, जेएनआरएम, पांडिचेरी विश्वविद्यालय केंद्र और टैगोर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन जैसे स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 20 संकाय सदस्य शामिल थे। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य श्री ए.एस. किरण कुमार शामिल हुए। उनके साथ इस्ट्रैक/इसरो के निदेशक श्री एम.आर. राघवेन्द्र, आईआईजी के निदेशक प्रो. ए.पी. डिमरी, इसरो मुख्यालय के विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय के निदेशक डॉ. तीर्थ प्रतिम दास और अंडमान निकोबार प्रशासन के निदेशक (शिक्षा/खेल/एचई/एस&टी) श्री आदित्य सांगोत्रा (डीएएनआईसीएस) भी उपस्थित थे।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अंतरिक्ष विज्ञान संपर्क कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र। बाईं ओर से: श्री आदित्य संगोत्रा (डीएएनआईसीएस), निदेशक (शिक्षा/खेल/उच्च शिक्षा/विज्ञान और प्रौद्योगिकी), अंडमान निकोबार प्रशासन; श्री एम.आर. राघवेन्द्र, निदेशक, इस्ट्रैक; श्री ए.एस. किरण कुमार, पूर्व सचिव, अंतरिक्ष विभाग / अध्यक्ष, इसरो (मुख्य अतिथि); प्रो. ए.पी. डिमरी, निदेशक, आईआईजी; और डॉ. तीर्थ प्रतिम दास, निदेशक, विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय, इसरो मुख्यालय।
उद्घाटन समारोह के दौरान, श्री ए एस किरण कुमार ने अंतरिक्ष में भारत की श्रेष्ठता के महत्व के बारे में चर्चा की। इस्ट्रैक के निदेशक श्री एम आर राघवेन्द्र ने अंतरिक्ष और भू प्रणालियों, दोनों से वैज्ञानिक प्रेक्षण करने के महत्व का ज़िक्र किया। आईआईजी के निदेशक प्रो. ए. पी. डिमरी ने ग्रहीय चुंबकत्व के महत्व और भूचुम्बकत्व क्षेत्र एवं अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र के मध्य होने वाली प्रतिक्रियाओं के माध्यम से पृथ्वी और सूर्य के बीच के संबंध के बारे में बात की। डॉ. तीर्थ प्रतिम दास ने अंतरिक्ष अन्वेषण के मुख्य उद्देश्य, अर्थात ब्रह्मांड की कार्यशैली को और अंतरिक्ष विज्ञान के व्यापक नज़रिए से जीवन और बुद्धिमत्ता के पहलू ओ समझने पर बल दिया। अंडमान निकोबार प्रशासन के निदेशक (शिक्षा/खेल/उच्च शिक्षा/एस&टी) श्री आदित्य संगोत्रा (डीएएनआईसीएस) ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के छात्रों के लिए इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालने के साथ ही, उन्होंने स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों के संकाय सदस्यों और छात्रों को भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा की तैयारियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान, इसरो मुख्यालय के विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय के उप निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने संकाय सदस्यों का धन्यवाद किया। उन्होंने छात्रों की रुचि को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी की तरफ एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मोड़ने में उनकी अहम भूमिका की सराहना की।
इस कार्यक्रम में शामिल लोगों में इसरो और आईआईजी के छात्र, संकाय सदस्य और क्षेत्र विशेषज्ञ शामिल थे।
इस कार्यक्रम में कई तत्व शामिल थे, यथा भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान अन्वेषण कार्यक्रम, सौर भौतिकी, ठोस पृथ्वी और भूचुम्बकत्व कैसे सौर चुंबकीय क्षेत्र के साथ मिलकर अंतरिक्ष के मौसम को नियंत्रित करते हैं, तुलनात्मक ग्रह-विज्ञान, एक्सोप्लैनेट और खगोल जीवविज्ञान जैसे विषयों पर सूचनप्रद व्याख्यान के साथ साथ छात्रों और क्षेत्र विशेषज्ञों के मध्य विस्तृत चर्चा के सत्र और एक अंतरिक्ष प्रदर्शनी भी शामिल थी।
कार्यक्रम स्थल पर लगी अंतरिक्ष प्रदर्शनी का एक दृश्य।
यह कार्यक्रम सितंबर 2024 में इसरो और आईआईजी के बीच हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य दोनों संस्थानों के संसाधनों को संयुक्त रूप से राष्ट्र के सभी हिस्सों तक पहुंचाना एवं अंतरिक्ष विज्ञान तथा अन्वेषण कार्यक्रम के बारे में जागरूकता फैलाना था। इस संदर्भ में, यह ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2025 की शरद ऋतु में, इसरो ने देश के सभी पूर्वोत्तर राज्यों में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों की एक शृंखला आयोजित की। यह कार्यक्रम इसरो द्वारा प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के माननीय प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' विज़न के अंतर्गत अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े लक्ष्यों को साकार करने के लिए देश भर में जागरूकता पैदा करना और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की नींव रखना है।